रांची एयरपोर्ट पर संकट: 850+ एकड़ पर अवैध कब्जा, देश के 7वें सबसे बड़े हवाई अड्डे का भविष्य अधर में
Illegal Encroachment on Over 850 Acres
रांची। Illegal Encroachment on Over 850 Acres, झारखंड की राजधानी रांची स्थित बिरसा मुंडा हवाई अड्डा इन दिनों दोहरी चुनौती से जूझ रहा है। एक ओर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण के कारण इसकी जमीन लगातार सिमट रही है।
वहीं, दूसरी ओर केंद्र सरकार के मोनेटाइजेशन प्लान के तहत निजीकरण की सूची से बाहर होने से इसके विकास की रफ्तार पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एयरपोर्ट की कुल 1,520 एकड़ जमीन में से लगभग 858 एकड़ पर अवैध कब्जा हो चुका है। इसके कारण एयरपोर्ट प्रबंधन के पास अब केवल करीब 514 एकड़ जमीन ही उपयोग के लिए बची है।
वर्ष 1941-43 और 1963-64 के बीच इस जमीन का अधिग्रहण किया गया था, जिसके आधार पर यह देश के बड़े एयरपोर्ट्स की सूची में शामिल किया गया था।
सुरक्षा पर बढ़ता खतरा
हवाई यातायात में लगातार वृद्धि के बीच रांची एयरपोर्ट के विस्तार की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। लेकिन अतिक्रमण के कारण न केवल विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
एयरपोर्ट के आसपास अनियोजित निर्माण और बस्तियों का फैलाव विमानन नियमों के विपरीत है। सुरक्षा एजेंसियां भी समय-समय पर इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कार्रवाई की जरूरत जता चुकी हैं।
देश के बड़े हवाई अड्डा में सातवां स्थान
क्षेत्रफल के आधार पर रांची का यह एयरपोर्ट देश के शीर्ष 10 बड़े एयरपोर्ट्स में सातवें स्थान पर गिना जाता है। इस सूची में राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा जैसे आधुनिक और विस्तारित एयरपोर्ट शामिल हैं। इन एयरपोर्ट्स के तेजी से हो रहे विस्तार के बीच रांची एयरपोर्ट की जमीन का सिकुड़ना चिंता का विषय बन गया है।
14 साल बाद भी नहीं मिली 303 एकड़ जमीन
एयरपोर्ट विस्तार के लिए वर्ष 2012-13 से 303 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अब तक यह जमीन एयरपोर्ट प्रबंधन को हस्तांतरित नहीं हो सकी है। इस संबंध में 35 से अधिक बैठकें हो चुकी हैं।
वर्तमान में 1941-44 के नक्शों के आधार पर जमीन का सर्वे किया जा रहा है। राज्य सरकार से यह जमीन 30 वर्षों के लिए लीज पर प्रस्तावित है, लेकिन चिन्हित भूमि पर मंदिर सहित करीब 150 से अधिक घरों का अतिक्रमण है।
रुकी हुई विकास योजनाएं
जमीन की कमी के कारण कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अधर में लटकी हैं, जिनमें आइसोलेशन बे, कैट-टू लाइट सिस्टम, पैरेलल टैक्सी ट्रैक, टर्मिनल विस्तार, ग्रीनफील्ड एरिया डेवलपमेंट और कार्गो कॉम्प्लेक्स शामिल हैं।
यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि
रांची एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रतिदिन करीब 8,000 यात्री यहां से आवागमन कर रहे हैं। कई एयरलाइंस कंपनियों ने नई उड़ानें शुरू करने के लिए प्रस्ताव दिए हैं।
एयरपोर्ट को एनवायरमेंट क्लीयरेंस से संबंधित आईएसओ प्रमाणन भी मिल चुका है, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
योजना के तहत तीन की जगह आठ सिक्योरिटी चेक काउंटर, एक के बजाय दो डिपार्चर एरिया, 16 से बढ़ाकर 38 एयरलाइन काउंटर और प्रवेश-निकास के लिए अतिरिक्त गेट विकसित किए जाने हैं। 22 नए काउंटर बनाने का भी प्रस्ताव है
अतिक्रमण हटाने, जमीन हस्तांतरण और स्पष्ट विकास नीति पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो रांची की हवाई कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास प्रभावित हो सकता है। -एवी कृष्णा, पूर्व निदेशक, रांची एयरपोर्ट
रांची एयरपोर्ट पर यात्री सुविधाओं के विस्तार के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं चल रही हैं। विस्तार के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है और सर्वे के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। जिला प्रशासन को जमीन हस्तांतरण के मामले में गंभीरता दिखानी होगी। -संजय सेठ, रक्षा राज्य मंत्री